बाल कहानी–भालू और लोमड़ी

ये कहानी मैने अपनी पाञ्च वर्षीया बेटी को सुनाते हुये बनायी थी। वो सोने से पहले लगभग प्रतिदिन मुझसे कोई ना कोई कहानी सुनती है। मैं ऐसे ही कहानी बना कर उसे सुना देता हूँ। कभी कभी वो कहानी सच में अच्छी बन जाती है। ये कहानी ऐसी ही थी।

मुझे लगा कि मुझे इसे दूसरे को भी पढ़ाना चाहिये ताकि यदि कोई इसे अपने बच्चों को सुनाना चाहे तो सुना सके। ये कहानी 5-6 वर्ष तक के बच्चों के लिये है। यदि आप कोई सुझाव या टिप्पणी करना चाहें तो अवश्य लिखें।

बच्चों के लिये कहानी

एक बार की बात है एक हिम भालू (मादा) और उसका बच्चा एक गुफा में रहते थे। बच्चा अभी छोटा था इस लिये उसकी माँ ने उसे बाहर निकलने से मना किया था। उस बच्चे का मन बाहर जा कर खेलने को करता था पर उसकी माँ ने उसे समझाया कि वो अभी छोटा है और वो बाहर की शीत वायु सहन नहीं कर पायेगा।

एक दिन जब उसकी माँ खाना ढूँढने गुफा से दूर गई हुई थी तो वो गुफा से बाहर चला गया। उसे अपने चारों ओर सफेद हिम को देख कर बहुत आनन्द आया। वो सोचने लगा ये तो बड़ी सुन्दर जगह है पता नहीं माँ मुझे क्यों नहीं खेलने देती।

तभी उसे एक लोमड़ी का बच्चा मिला जो अपनी गुफा से बाहर आ कर घूम रहा था। उन दोनों में मित्रता हो गई। दोनो एक दूसरे के साथ मिल कर खेलने लगे तथा हिम के गोले बना बना कर एक दूसरे के ऊपर फेंकने लगे। बहुत देर तक खेलने के बाद जब उन्हे भूख सताने लगी तो वो अपनी अपनी गुफा की ओर चल दिये। उन्होने एक दूसरे को पुनः मिलने का वादा किया।

भालू के गुफा में पहुँचने के कुछ देर उपरान्त ही उसकी माँ उसके लिये खाना ले कर आ गई। पर उसने देखा कि नन्हा भालू सुस्त है तथा उसको देखकर उसके आँखों में कोई प्रसन्नता नहीं दिखी। वो समझ गई कि कुछ गड़बड़ है। भालू को शीत वायु में खेलने के कारण खाँसी हो गई थी तथा उसकी छाती भी जम सी गई थी। उसको साँस लेने में भी कठिनाई हो रही थी।

भालू की माँ ने उसे शीघ्र ही अपनी गोद में उठाया तथा सहलाने लगी। उसको पता चल चुका था कि नन्हा भालु गुफा से बाहर गया था। उसने उसे समझाया कि उसको कहना मानना चाहिये था। भालू ने धीमी ध्वनि में अपनी माँ से क्षमा माँगी तथा दोबारा ऐसा ना करने का वादा किया। भालू की माँ ने उसकी छाती पर कुछ मला तथा उसे अपनी छाती से लगा कर सुला दिया।

दूसरे दिन भालू ठीक हो गया। जब उसकी माँ खाना लेने चली गई तो उसने देखा कि लोमड़ी का बच्चा उसे खेलने के लिये बुलाने आया है। उसने मना कर दिया। लोमड़ी का बच्चा अकेला ही खेलता रहा। साँयकाल होते ही उसकी दशा भी वैसी ही हो गई। रात होते होते लोमड़ी की माँ उसे भी भालू की माँ के पास ले के आयी। भालू की माँ ने उसकी छाती पर कुछ मला तथा उसे अपनी छाती से लगा के सुला दिया।

अगली सुबह वो भी स्वस्थ हो गया।

दोनों ने बच्चों को समझाया कि कहना मानना चाहिये तथा जब वो थोड़े बड़े हो जायेंगे तो वो बाहर जा कर खेल सकते हैं। दोनों ने मिलकर वादा किया कि वो अब ऐसा नहीं करेंगे।

वो दोनो अब गुफा के भीतर ही खेलने लगे।

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